रायपुर। राजधानी रायपुर नगर निगम ने एक नया फैसला लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। निगम ने शहर में किसी भी प्रकार का विरोध प्रदर्शन या धरना आयोजित करने पर ₹500 शुल्क अनिवार्य कर दिया है। नगर निगम का कहना है कि यह शुल्क धरना स्थलों की साफ-सफाई और रखरखाव के लिए लिया जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस निर्णय की तीखी आलोचना करते हुए इसे “विरोध पर टैक्स” और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला नागरिकों की आवाज़ दबाने और असहमति को सीमित करने का प्रयास है।

धरना स्थल बंद, अब शुल्क देकर ही मिलेगी अनुमति

नगर निगम का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब रायपुर का प्रमुख प्रदर्शन स्थल, टूटा धरना स्थल, पहले ही दो महीने के लिए बंद किया जा चुका है। रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने “रखरखाव कार्य” का हवाला देते हुए वहां किसी भी प्रकार के धरना या सभा पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया है। इस वजह से फिलहाल शहर में कोई अधिकृत धरना स्थल नहीं बचा है। ऐसे में जब यह प्रतिबंध हटेगा, तब प्रदर्शनकारियों को अपनी आवाज़ उठाने के लिए शुल्क अदा करना होगा।

नगर निगम ने किया बचाव, विपक्ष ने किया विरोध

नगर निगम की महापौर और भाजपा नेता मीनल चौबे ने इस नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार के निर्देशों के अनुरूप लिया गया कदम है और इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था और सफाई बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि अनुमति प्रक्रिया से प्रशासन को जुलूस के मार्ग और व्यवस्था की जानकारी मिलती है। वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे जनता के मौलिक अधिकारों पर प्रहार बताया। नगर निगम की आमसभा में पारित प्रस्ताव के अनुसार, मंच या पंडाल लगाने पर प्रति वर्ग फुट ₹5 का अतिरिक्त शुल्क भी वसूला जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, यह शुल्क आगे बढ़ाकर ₹1,000 तक किया जा सकता है, जिसके प्रस्ताव को भी निगम बैठक में सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई है।

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