रायगढ़। अम्बुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप) की प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 24 घंटे से अधिक समय से रायगढ़ कलेक्ट्रेट के सामने डटे धरमजयगढ़ ब्लॉक के पुरूँगा, तेन्दुमुड़ी और साम्हरसिंघा गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने शुक्रवार शाम एक आपात बैठक कर आंदोलन स्थल बदलने का फैसला लिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीणों ने प्रशासन की चुप्पी से नाराज होकर तय किया है कि अब आंदोलन कलेक्ट्रेट से उठाकर सीधे पुरूँगा गांव में जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी मांगों को नजरअंदाज कर उल्टे जनसुनवाई स्थल पर टेंट वगैरह लगवाना शुरू कर दिया है।
“अब गांव में नहीं घुसने देंगे प्रशासन”
बैठक में ग्रामीणों ने एकमत से निर्णय लिया कि जब तक जनसुनवाई रद्द नहीं होती, वे किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे अब अपने ही गांव में धरना जारी रखेंगे और वहां से विरोध को और व्यापक बनाएंगे। उनका आरोप है कि कलेक्टर और जिला प्रशासन ने दो दिनों से जारी शांतिपूर्ण आंदोलन की अनदेखी की है और फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के आधार पर जनसुनवाई कराने की तैयारी में जुटे हैं।
अडानी खदान के खिलाफ “जल-जंगल-जमीन” की जंग तेज
धरना स्थल पर माहौल लगातार उग्र होता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जबरन जनसुनवाई कराई गई तो पुरूँगा गांव में भारी विरोध होगा। “जल-जंगल-जमीन हमारी पहचान है, इसे किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे” — यह नारा शुक्रवार रात तक पुरूँगा और आसपास के गांवों में गूंजता रहा। सूत्रों के मुताबिक अब यह आंदोलन कलेक्ट्रेट से गांव तक लौटकर और व्यापक रूप ले चुका है।


