जिले में चोरी की दो घटनाएँ, 15 बोरी चावल 31,500 तो दूसरी जगह 55 बोरी सिर्फ 29,000 की ??
रायगढ़ जिले की दो शासकीय राशन दुकानों में चोरी की घटनाओं ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोली है, बल्कि चोरी हुए सामान की आंकी गई कीमतों ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। पहली FIR में जहां 15 बोरी चावल की कीमत 31,500 रुपये दर्ज की गई है, वहीं दूसरी FIR में 55 बोरी चावल, 12 बोरी शक्कर और 4 बोरी नमक सहित कुल चोरी की कीमत मात्र 29,000 रुपये दिखाई गई है। दोनों मामलों में मूल्यांकन का यह उलटा-सीधा अंतर ग्रामीणों में संदेह पैदा कर रहा है कि कहीं चोरी की आड़ में मात्रा या मूल्य को लेकर गड़बड़ी तो नहीं हो रही। जतरा और गेरवानी पंचायतों में हुई घटनाएँ कई दिनों बाद सामने आईं, जिससे यह भी स्पष्ट होता है कि दुकानों की निगरानी और ताला-बंध व्यवस्था बेहद कमजोर है। दोनों दुकानों के संचालकों का दावा है कि घटना रात में हुई और उन्हें अगले दिन या कई दिन बाद पता चला, जिसके बाद जनता और जनप्रतिनिधियों के दबाव में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
लैलूँगा के जतरा दुकान में खिड़की तोड़कर चोरी, 15 बोरी का मूल्य बढ़ा हुआ?
जतरा राशन दुकान में संचालक नूतन प्रधान ने शिकायत में बताया कि अज्ञात चोरों ने रात में खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया और 15 बोरी चावल ले गए। FIR के अनुसार इन 15 बोरियों की कीमत 31,500 रुपये बताई गई है, यानी लगभग 2,100 रुपये प्रति बोरी—जो सामान्य सरकारी दरों से काफी अधिक मानी जाती है। मूल्यांकन में इस असामान्य बढ़ोतरी ने ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की शंका बढ़ा दी है। सूचना मिलने पर लैलूंगा पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर धारा 305 व 331(4) के तहत जांच शुरू कर दी है। जांच अधिकारी खिड़की तोड़ने के तरीके, घटना के समय, और दुकान में पिछले दिनों के स्टॉक का मिलान कर रहे हैं।
गेरवानी में ताला टूटा मिला, भारी मात्रा में सामान पर कम कीमत दर्ज
दूसरा मामला गेरवानी पंचायत का है, जहां दुकान आठ दिनों तक बंद रहने के बाद खोली गई तो ताला टूटा हुआ मिला। गिनती में 55 बोरी चावल, 12 बोरी शक्कर और 4 बोरी नमक कम पाया गया। सामान्य सरकारी मूल्यांकन के अनुसार यह चोरी 80–90 हजार रुपये तक हो सकती थी, पर FIR में इसकी कीमत मात्र 29,000 रुपये दर्ज की गई है—जो चावल की भारी मात्रा की तुलना में बेहद कम है। संचालिका ने इस बात की सूचना सरपंच, उपसरपंच और जनपद उपाध्यक्ष को देने के बाद থানے में रिपोर्ट दर्ज कराई। दोनों FIR में मूल्यांकन का विरोधाभास अब पुलिस जांच का प्रमुख बिंदु बन गया है, और ग्रामीण भी यह जानना चाहते हैं कि यह मामला केवल चोरी का है या रिकॉर्ड के अंदर किसी बड़े खेल की बू छिपी है।



