रायगढ़, 27 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में स्टार्टअप इकोसिस्टम की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले डेढ़ साल (फरवरी 2024 से अब तक) में यहां एक भी नया स्टार्टअप पंजीकृत नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय युवाओं में निराशा और बेरोजगारी की भावना बढ़ रही है। राज्य स्तर पर स्टार्टअप की संख्या में वृद्धि के बावजूद, रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिलों में उद्यमिता का विकास रुका हुआ है।

छत्तीसगढ़ में दिसंबर 2023 तक कुल 362 स्टार्टअप पंजीकृत थे, लेकिन इनमें से अधिकांश रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे शहरी केंद्रों में केंद्रित हैं। रायगढ़ जिले में स्टार्टअप की सूची में कोई नई प्रविष्टि नहीं दिखाई देती, जबकि राज्य सरकार की स्टार्टअप छत्तीसगढ़ योजना 2024-30 के तहत नए पैकेज की घोषणा की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिले की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कोयला खनन, स्टील और पावर सेक्टर पर निर्भर होने के कारण युवा पारंपरिक नौकरियों की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन इन क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर सीमित हैं।

युवाओं की निराशा और बेरोजगारी का बोझ

रायगढ़ के युवा, जो इंजीनियरिंग, एमबीए और अन्य उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, स्टार्टअप शुरू करने के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। राज्य में 16 लाख से अधिक पंजीकृत बेरोजगार युवा हैं, जिनमें से अधिकांश गरीब और मध्यम वर्ग से आते हैं। एक स्थानीय युवा उद्यमी ने बताया, “हमारे जिले में इंक्यूबेशन सेंटर या फंडिंग की सुविधा नहीं है। रायपुर जाना पड़ता है, लेकिन वहां भी प्रतिस्पर्धा कड़ी है।” यह स्थिति भारत के व्यापक युवा बेरोजगारी संकट को दर्शाती है, जहां स्टार्टअप युवाओं को सस्ते श्रम में बदल रहे हैं, लेकिन नए उद्यमों की शुरुआत नहीं हो रही।

मार्च 2024 में रायगढ़ के केजी आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में स्टार्टअप बूट कैंप आयोजित किया गया था, जहां युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रेरित करने का प्रयास किया गया। हालांकि, इन प्रयासों के बावजूद, कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। रायगढ़ में सूचीबद्ध “स्टार्टअप” जैसे क्वेस, महिंद्रा लॉजिस्टिक्स आदि वास्तव में बड़ी कंपनियों के कार्यालय हैं, न कि स्थानीय नवोदित उद्यम।

कारण और संभावित समाधान

विशेषज्ञों के अनुसार, रायगढ़ में स्टार्टअप की कमी के प्रमुख कारण हैं:

औद्योगिक फोकस: जिला कोयला और स्टील उद्योग पर निर्भर है, जहां युवाओं को पारंपरिक नौकरियां मिलती हैं, लेकिन इनमें संकट बढ़ रहा है।

संसाधनों की कमी: कोई स्थानीय इंक्यूबेटर या वेंचर कैपिटल नहीं। राज्य स्तर पर 45 से अधिक स्टार्टअप हैं, लेकिन रायगढ़ में शून्य वृद्धि।

शिक्षा और कौशल अंतर: भारत में केवल 51.25% युवाओं के पास रोजगार योग्य कौशल हैं, जो स्टार्टअप संकट को बढ़ाता है।

सरकार की स्टार्टअप इंडिया योजना के तहत छत्तीसगढ़ में नए पैकेज लाए गए हैं, लेकिन जिला स्तर पर क्रियान्वयन की आवश्यकता है। युवाओं का सुझाव है कि लोकल बूट कैंप, फंडिंग और मेंटरशिप प्रोग्राम बढ़ाए जाएं। यदि यह स्थिति जारी रही, तो युवा पलायन बढ़ सकता है, जो जिले की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगा।

अधिक जानकारी के लिए स्टार्टअप छत्तीसगढ़ पोर्टल पर संपर्क करें।