
रायगढ़, 27 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में अदानी समूह की कोयला खनन और ऊर्जा परियोजनाएं विवादों के घेरे में हैं। पेलमा और गारे पेलमा ब्लॉकों में बड़े पैमाने पर खनन से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों की आजीविका प्रभावित हो रही है, जबकि 600 मेगावाट के मौजूदा कोयला पावर प्लांट के विस्तार की योजना से पर्यावरणीय खतरे बढ़ गए हैं। स्थानीय रिपोर्ट्स और सामाजिक कार्यकर्ताओं की जांच के आधार पर, हमारी एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में सामने आया है कि जून 2025 में हजारों पेड़ों की कटाई और विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं, जबकि मुआवजा और पुनर्वास योजनाएं अधर में लटकी हैं।
कोयला खनन का विस्तार और पर्यावरणीय नुकसान
अदानी समूह गारे पेलमा-II कोयला ब्लॉक में 23.6 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) की क्षमता वाली ओपनकास्ट खदान संचालित कर रहा है, जो महाराष्ट्र स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी (महाजेनको) के साथ साझेदारी में है। गारे पेलमा-III ब्लॉक भी अदानी के नियंत्रण में है, हालांकि इसमें उत्पादन अभी शुरू नहीं हुआ है। पेलमा क्षेत्र में सात गांव प्रभावित हुए हैं, जबकि गारे पेलमा-II से दो दर्जन से अधिक गांवों पर असर पड़ा है। जून 2025 में, गारे पेलमा-II में कम से कम 5,000 पेड़ काटे गए, जिसके खिलाफ स्थानीय निवासियों ने विरोध किया और सात लोगों को अवैध रूप से हिरासत में लिया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह वन कटाई ग्राम सभा की सहमति के बिना हुई है, जो आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन है।
खनन से कृषि भूमि, जंगल और जल स्रोत प्रदूषित हो रहे हैं। स्थानीय लोग पारंपरिक आजीविका से वंचित हो गए हैं, और पानी की समस्या बढ़ गई है। रिपोर्ट्स में सामने आया है कि औद्योगिक इकाइयों से रासायनिक प्रदूषित पानी अवैध रूप से छोड़ा जा रहा है, जिससे हजारों एकड़ भूमि बंजर हो गई है और स्थानीय नदियां जैसे लूनी और जोजरी जहरीली हो गई हैं। आदिवासी समुदायों का कहना है कि उनकी जीवनशैली और पारंपरिक अधिकारों को भारी नुकसान पहुंचा है।
पावर प्लांट विस्तार: 1600 मेगावाट का जोखिम
अदानी पावर लिमिटेड रायगढ़ में मौजूदा 600 मेगावाट (2×300 MW) प्लांट का विस्तार कर दो नए 800 मेगावाट यूनिट जोड़ने की योजना बना रहा है, जिससे कुल क्षमता 2200 MW हो जाएगी। पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) पूरा हो चुका है, और 29 मई 2023 को सार्वजनिक सुनवाई हुई थी। हालांकि, फरवरी 2025 में परियोजना को मंजूरी मिली, लेकिन स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया। यह प्लांट चरोदी नदी के पास स्थित है, जो स्थानीय जल स्रोतों को प्रभावित कर सकता है, और फ्लाई ऐश निपटान से प्रदूषण बढ़ने की आशंका है।
विस्तार के लिए 1700 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहण की जरूरत है, जो कई गांवों को प्रभावित करेगी। पर्यावरण मंत्रालय ने जुलाई 2025 में मंजूरी दी, लेकिन कांग्रेस ने इसे NGT के आदेशों का उल्लंघन बताया। जनवरी 2024 में NGT ने पर्यावरण मंजूरी रद्द की थी, लेकिन सितंबर 2024 में दोबारा मंजूरी दे दी गई।

स्थानीय विरोध और कानूनी लड़ाई
रायगढ़ में विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। जुलाई 2025 में, तमनार क्षेत्र में पुलिस सुरक्षा में जंगलों की कटाई हुई, जिसे आदिवासी आजीविका पर हमला बताया गया। सामाजिक मीडिया पर स्थानीय लोगों ने मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाए। आदिवासी संगठनों ने जनवरी 2024 में हरिहरपुर गांव में परसा कोयला खदान के खिलाफ प्रदर्शन किया। मुआवजा मिला है, लेकिन इसे अपर्याप्त माना जाता है, और पुनर्वास योजनाएं अधूरी हैं।
कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी: दिखावा या वास्तविकता?
अदानी समूह ने सीएसआर के तहत स्कूल, शौचालय और अन्य सुविधाएं बनवाई हैं, साथ ही मई 2025 में भारत का पहला हाइड्रोजन ट्रक गारे पेलमा-III से कोयला परिवहन के लिए लॉन्च किया, जो स्थिरता का दावा करता है। हालांकि, कार्यकर्ता इसे पर्यावरणीय नुकसान का पर्दा बताते हैं, और स्थानीय लोग गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
निष्कर्ष: संघर्ष जारी
अदानी का रायगढ़ विस्तार पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के बीच संघर्ष का प्रतीक है। जबकि समूह का दावा है कि ये परियोजनाएं आर्थिक विकास लाएंगी, स्थानीय समुदायों की पीड़ा और पर्यावरणीय तबाही से सवाल उठते हैं। प्रशासन की निगरानी और कानूनी प्रक्रियाएं जारी हैं, लेकिन बिना ठोस समाधान के विवाद बढ़ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए पर्यावरण मंत्रालय की वेबसाइट देखें।
(हमारे न्यूज़ पोर्टल की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: स्थानीय और पर्यावरणीय मुद्दों पर गहन जांच के साथ, हम विश्वसनीय और संतुलित समाचार प्रदान करते हैं।)
