रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए तीन नए विधायकों—गजेन्द्र यादव, गुरु खुशवंत साहेब और राजेश अग्रवाल—को मंत्री पद की शपथ दिलवाई। राज्यपाल रमेन डेका ने राजभवन में शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ छत्तीसगढ़ में पहली बार मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 14 (मुख्यमंत्री समेत) हो गई है।   

किसे मिला कौन-सा विभाग

शपथ के तुरंत बाद विभागों का बंटवारा भी कर दिया गया:

• गजेन्द्र यादव – स्कूल शिक्षा, ग्रामोद्योग (कॉटेज इंडस्ट्री), विधि एवं विधायी कार्य

• गुरु खुशवंत साहेब – कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार, अनुसूचित जाति विकास

• राजेश अग्रवाल – पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व

साथ ही व्यापक फेरबदल में मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग अपने पास लिया; केदार कश्यप को परिवहन, उपमुख्यमंत्री अरुण साव को खेल एवं युवक कल्याण, टैंक राम वर्मा को उच्च शिक्षा, लक्ष्मणलाल देवांगन को वाणिज्यिक कर (आबकारी) और श्याम बिहारी जायसवाल को ओबीसी एवं अल्पसंख्यक विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई।  

कानूनी बहस: 90 सदस्यीय विधानसभा में ‘14 मंत्री’ मान्य या नहीं?

विपक्ष का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 164(1A) के तहत मंत्रिपरिषद की अधिकतम संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% तक सीमित है; 90 का 15% 13.5 होता है, इसलिए सीमा 13 मानी जानी चाहिए। इसी आधार पर विस्तार को “असंवैधानिक” बताकर चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका पर अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की गई है। राज्य सरकार का तर्क है कि यह “हरियाणा मॉडल” के अनुरूप है, जहाँ 90 सदस्यीय सदन में 14 मंत्री हैं; इसी मिसाल पर छत्तीसगढ़ में 14 का गठन किया गया।    

पूर्व CM भूपेश बघेल ने भी 14 सदस्यीय कैबिनेट को लेकर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई और केंद्र की स्वीकृति की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।  

सरकार की दलीलें बनाम विपक्ष की आपत्तियाँ—संक्षेप में

• सरकार का पक्ष: 15% की गणना में राउंडिंग-अप की व्याख्या और हरियाणा की प्रैक्टिस का हवाला; सामाजिक–क्षेत्रीय संतुलन मजबूत होने का दावा।  

• विपक्ष का पक्ष: 13.5 का अर्थ 13 तक सीमित समझा जाए; 25 वर्षों से 13 की परंपरा रही है, इसलिए 14 “सीमा से अधिक” है—मामला अदालत में।  

राजनीतिक संदेश: क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस

नए चेहरों के आने से सूरगुजा क्षेत्र की पकड़ और मजबूत मानी जा रही है, जबकि बस्तर की प्रतिनिधित्व-भागीदारी को लेकर बहस जारी है। सत्तापक्ष इसे व्यापक संतुलन की कवायद बताता है।  

पृष्ठभूमि

दिसंबर 2023 में BJP सरकार बनने के बाद मंत्रिमंडल 12 तक पहुँचा था। बाद में लोकसभा चुनाव के बाद बृजमोहन अग्रवाल के इस्तीफे से संख्या घटकर 11 रह गई थी—अब यह संख्या 14 हो चुकी है। यह विस्तार मुख्यमंत्री के कार्यकाल का पहला बड़ा पुनर्संतुलन माना जा रहा है।  

क्या आगे?

हाईकोर्ट में दायर याचिका पर अगली सुनवाई में सरकार से विस्तृत हलफ़नामा मांगा गया है। अदालत में होने वाली कार्यवाही यह स्पष्ट करेगी कि 15% सीमा का व्यावहारिक अर्थ (13 या 14) छत्तीसगढ़ में क्या माना जाएगा। तब तक नए मंत्री अपने-अपने विभागों का कार्यभार संभालेंगे और हालिया फेरबदल के आधार पर नीति-निर्णय आगे बढ़ेंगे।  

स्रोत: शपथ समारोह, पोर्टफोलियो और कानूनी विवाद से जुड़े तथ्य न्यू इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, बिज़नेस स्टैंडर्ड, और हिंदुस्तान टाइम्स समेत विश्वसनीय रिपोर्ट्स पर आधारित हैं; राज्यपाल और शपथ से जुड़ी सूचनाएँ राजभवन/सरकारी एवं राष्ट्रीय प्रसारक की रिपोर्टिंग से पुष्ट हैं।    

नोट: मामला न्यायिक विचाराधीन है; कोर्ट के अंतिम निर्णय तक संख्या और व्याख्या पर अंतिम राय सुरक्षित रखी जाती है।