दिल्ली :

त्योहारों से पहले केंद्र सरकार ने GST 2.0 लाकर अमूल-चूल बदलाव किए हैं। साबुन, शैंपू, दवाइयां, इंश्योरेंस—सब सस्ते; तंबाकू, सिगरेट व लग्जरी वस्तुएं महंगी। सिंगल डिजिटल सिस्टम, दो सरल टैक्स स्लैब और उपभोक्ताओं की जेब में बचत। लेकिन, राजस्व घरेलू बजट में गिरावट और असंगठित बाजार में चुनौती बरकरार है। जानिए, नए GST में किसे क्या फायदा, क्या नुकसान.

नई GST रेट्स के फायदे

  • रोजमर्रा के सामान पर राहत: शैंपू, साबुन, टूथपेस्ट, ब्रेड, घी, मसाले, दवाइयां, इंश्योरेंस, पैक्ड फूड जैसी चीज़ें पहले 12% या 18% GST में आती थीं, अब इन पर GST सिर्फ 5% या शून्य हो गया है। इससे रोजमर्रा के बजट में सीधी बचत होगी और महंगाई में गिरावट आएगी.
  • जीवन बीमा, दवा व स्वास्थ्य खर्च टैक्स फ्री: इंश्योरेंस पॉलिसी और दवाइयों पर अब टैक्स नहीं लगेगा, जिससे हेल्थकेयर का खर्च कम होगा और लोग ज्यादा बीमा ले सकेंगे.
  • MSMEs और छोटे व्यापारी मजबूत: इनपुट और रॉ मटेरियल पर टैक्स की समस्या (Inverted Duty Structure) दूर की गई है। कारोबारी अब सस्ता माल बनाकर आगे बेच सकते हैं, कागजी काम कम होगा.
  • विवाद कम, पासा सरल: स्लैब कम होने से कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के लिए टैक्स समझना आसान हुआ, कागजी बोझ घटा, रिफंड सिस्टम सुधरा, डिजिटलीकरण बढ़ा है.
  • खपत बढ़ेगी: सस्ते उत्पादों से मांग (consumption) बढ़ेगी, जिससे उत्पादन, रोजगार और आर्थिक विकास को गति मिलेगी.

नई GST रेट्स के नुकसान

  • अव्यवस्थित क्षेत्र (Unorganized Sector) को बहुत फायदा नहीं: टैक्स रेट कटौती संगठित (registered) सेक्टर में असर ज्यादा दिखा सकती है, ग्रामीण व कच्चे बाजारों में लाभ सीमित होगा.
  • महंगी वस्तुएँ और ‘सिन गुड्स’ पर टैक्स ज्यादा: पान मसाला, बियर, तंबाकू, सिगरेट, महंगे गहने, पर्फ्यूम, लग्जरी वस्तुएं अब 40% GST में रखी गई हैं – इनका दाम और बढ़ सकता है। आम आदमी के लिए नहीं, लेकिन कुछ वर्गों पर असर पड़ेगा.
  • राज्य सरकारों पर दबाव: टैक्स कलेक्शन घटने से राज्य सरकारों को विशेष मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। वित्तीय असंतुलन की संभावना है.
  • कर ‘पास ऑन’ हमेशा नहीं: सरकार और विशेषज्ञों ने कंपनियों- दुकानदारों को सचेत किया है कि टैक्स कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुँचे, लेकिन कई बार मुनाफा बढ़ाने के लिए पूरी कटौती पास नहीं की जाती है.

निष्कर्ष और आगे की राह: नई GST रेट व्यवस्था से आम लोगों के लिए बड़ी राहत है और घरेलू बजट नियंत्रित रहेगा। उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें कम होने से खपत और खुशहाली बढ़ेगी, MSMEs और कारोबारी वर्ग मजबूत होंगे। मगर सरकार को राजस्व कमी व राज्य फंडिंग, असंगठित सेक्टर तक राहत पहुँचाने की चुनौती से लड़ना होगा। भारत के विकास के लिए टैक्स सुधारों को सही ढंग से लागू और मॉनिटर करने की ज़रूरत है।