1. रायगढ़ में हाथियों का कहर: रातों-रात बर्बाद हुई किसानों की फसलें
  2. 50 हाथियों का झुंड गांवों में घुसा, 28 किसानों के खेत रौंदा
  3. अमलीडीह और कांटाझरिया में तबाही, मुआवज़े की आस लगाए बैठे किसान
File Photo

रायगढ़ जिले में हाथियों का आतंक लगातार गहराता जा रहा है। सोमवार की रात को 50 से अधिक हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर काफरमार परिसर के कुरू गांव पहुंचा और यहां 20 किसानों की मेहनत को पलभर में बर्बाद कर दिया। हाथियों ने लहलहाती फसलों को रौंद डाला, जिससे किसानों की छह महीने की कड़ी मेहनत मिट्टी में मिल गई। अमलीडीह और कांटाझरिया गांव में भी इन्हीं हाथियों ने धावा बोलकर कुल 28 किसानों के खेतों को नुकसान पहुंचाया। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से लगातार यह झुंड गांवों के पास पहुंच रहा है और रातों-रात हजारों रुपए की फसल चौपट कर रहा है। हाथियों की आहट से लोग भयभीत होकर रातभर जागते हैं, क्योंकि घरों में घुसने का खतरा भी मंडरा रहा है। प्रशासन को बार-बार सूचना देने के बावजूद अभी तक ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इससे किसानों में नाराजगी और चिंता बढ़ रही है।

वन विभाग की टीम अलर्ट, लेकिन हाथी काबू से बाहर

ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग की टीमें लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं, लेकिन हाथियों की संख्या अधिक होने से उन्हें काबू में करना मुश्किल साबित हो रहा है। बताया जा रहा है कि झुंड में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 50 हाथी शामिल हैं, जो आसपास के जंगल से निकलकर सीधे खेतों की ओर बढ़ रहे हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों को रात्रि गश्त करने और ढोल-नगाड़ों से शोर मचाकर हाथियों को भगाने की सलाह दी है, हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े झुंड पर इन तरीकों का कोई असर नहीं हो रहा। हाथी खेतों में घुसते ही चारों ओर तबाही मचाने लगते हैं, और किसी भी आवाज या रोशनी से बेखौफ होकर घंटों तक फसलें रौंदते रहते हैं।

किसानों को मुआवज़े की उम्मीद, पर समाधान कब?

लगातार हो रहे नुकसान से किसान अब आर्थिक संकट में घिरते जा रहे हैं। कई किसानों ने बैंक और सहकारी समितियों से कर्ज लेकर खेती की थी, जो अब पूरी तरह चौपट हो चुकी है। ग्रामीण प्रशासन और सरकार से मुआवज़े की मांग कर रहे हैं, ताकि वे अपनी अगली फसल की तैयारी कर सकें। हालांकि अभी तक न तो सर्वे पूरा हुआ है और न ही मुआवज़ा राशि की घोषणा की गई है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। इधर वन विभाग का कहना है कि हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन यह समस्या तब तक हल नहीं होगी जब तक जंगल और गांवों के बीच प्राकृतिक भोजन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की जाती।

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