
एग्रीस्टैक पोर्टल की गड़बड़ी से 900 किसान प्रभावित
जशपुर जिले के मनोरा तहसील में दिख रहे गांवों की तकनीकी गड़बड़ी ने रायगढ़ के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। दरअसल, रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के 38 गांव एग्रीस्टैक पोर्टल पर जशपुर जिले की मनोरा तहसील में दर्ज हो रहे हैं। इस तकनीकी समस्या के कारण किसानों का पंजीयन रुक गया है और धान खरीदी की प्रक्रिया अधर में फंस गई है। इस बार खरीदी पूरी तरह से एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन के आधार पर की जानी है, लेकिन डिजिटल त्रुटि की वजह से लगभग 900 किसान प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब गांव ही गलत जिले में दिखाए जा रहे हैं तो पंजीयन कैसे संभव होगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह गड़बड़ी डेटा अपलोडिंग और पोर्टल अपडेट में हुई है। वहीं, किसानों का आरोप है कि समय रहते अधिकारियों ने ध्यान नहीं दिया, जिससे यह समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। स्थिति यह है कि किसान दिन-रात चक्कर काट रहे हैं और फसल बिकने की उम्मीद अधूरी लग रही है।
धान खरीदी पर संकट का बादल
किसानों का धान इस बार केवल एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन के बाद ही खरीदा जाएगा। गांवों में फसलवार रकबा पंजीयन के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी से डेटा लिया गया है, जिसे एग्रीस्टैक पोर्टल से मिलान करना अनिवार्य है। लेकिन जब गांव ही जशपुर में दर्ज हो रहे हैं तो यह मिलान संभव नहीं हो पा रहा है। परिणामस्वरूप पंजीयन की प्रक्रिया ठप है और किसानों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। किसानों को डर है कि कहीं देर होने पर वे सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ न खो बैठें।
किसानों ने जताई नाराज़गी
लगातार हो रही इस तकनीकी गड़बड़ी से किसान परेशान हैं। कई किसानों ने बताया कि वे बार-बार पोर्टल और तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही यह तकनीकी खामी दूर नहीं की गई तो हजारों क्विंटल धान घरों में ही पड़ा रह जाएगा। इस स्थिति ने लगभग 900 किसानों को सीधा प्रभावित किया है और ग्रामीण अंचलों में आक्रोश की लहर है। किसान अब शासन से तत्काल दखल की मांग कर रहे हैं ताकि खरीदी प्रक्रिया समय पर शुरू हो सके और उनकी मेहनत का मोल मिल पाए।
