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रायगढ़, 25 अक्टूबर। Taj News  अडानी पुरुंगा भूमिगत कोयला खदान परियोजना को लेकर शुक्रवार को धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के सभाकक्ष में प्रशासन, कंपनी प्रतिनिधि और ग्रामीण जनप्रतिनिधियों की बैठक हुई। बैठक में प्रशासन ने दावा किया कि ग्रामीण अब 11 नवंबर को प्रस्तावित पर्यावरणीय जनसुनवाई में शामिल होने पर सहमत हैं। वहीं बैठक के बाद गांवों में स्थिति कुछ अलग नजर आई। कई ग्रामीण इलाकों में आपसी बैठकें हुईं, जहां लोगों ने कहा कि उनकी जल-जंगल-जमीन से जुड़ी मूल चिंताओं का समाधान नहीं हुआ है, बल्कि उन्हें केवल “जनसुनवाई में जाकर अपनी बात रखने” की सलाह दी गई।

गांवों में बढ़ा अविश्वास -“सुनवाई नहीं, दबाव ज्यादा”
धरमजयगढ़ क्षेत्र के पुरुंगा, तेन्दुमुड़ी, सांभरसिंघा और आसपास के गांवों में लोग बैठक के बाद भी असंतोष में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और कंपनी ने बैठक में वादे तो किए  कि खनन भूमिगत होगा, जलस्तर और जंगल सुरक्षित रहेंगे लेकिन कोई ठोस दस्तावेज या तकनीकी आश्वासन नहीं दिया गया। लोगों का आरोप है कि यह बैठक सहमति का मंच नहीं, बल्कि जनसुनवाई को हर हाल में कराने की “औपचारिक प्रक्रिया” थी। बैठक से लौटे कई ग्रामीणों ने अपने-अपने गांवों में फिर पंचायतें बुलाईं और एक बार फिर जनसुनवाई रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया।

जल-जंगल-जमीन की लड़ाई , भूमिपुत्रों का संघर्ष जारी
धरमजयगढ़ का यह विवाद अब सिर्फ एक खदान परियोजना तक सीमित नहीं रहा। यह उस जमीनी हकीकत का प्रतीक बन गया है, जहां भूमिपुत्र अपने जंगल, खेत और जीवन को बचाने के लिए प्रशासनिक दावों से लड़ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, पर “विकास” अगर उनकी मिट्टी और नदियों की कीमत पर आएगा, तो यह सौदा स्वीकार नहीं। अब निगाहें 11 नवंबर की जनसुनवाई पर हैं , जो तय करेगी कि यह संवाद विश्वास की नींव रखेगा या संघर्ष की नई जंग का शंखनाद करेगा ।

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