रायगढ़ (TAJ NEWS NETWORK) अम्बुजा सीमेंट (अडानी ग्रुप) की प्रस्तावित कोयला खदान परियोजना को लेकर रायगढ़ में विरोध तेज हो गया है। धरमजयगढ़ ब्लॉक के पुरुंगा, तेन्दुमुड़ी और साम्हरसिंघा गांवों के सैकड़ों ग्रामीण गुरुवार सुबह 10 बजे से रायगढ़ कलेक्ट्रेट के सामने डटे हुए हैं। शुक्रवार, 7 नवम्बर को यह आंदोलन 24 घंटे पार कर चुका है। ग्रामीणों की स्पष्ट मांग है कि अम्बुजा सीमेंट की जनसुनवाई तत्काल रद्द की जाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिस ग्रामसभा प्रस्ताव को आधार बनाकर प्रशासन जनसुनवाई कराने की बात कह रहा है, वह फर्जी है और ग्रामीणों की असली राय को गलत ढंग से पेश किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी इस परियोजना को मंजूरी नहीं दी, बल्कि वे अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कलेक्टर के न पहुंचने से नाराज़गी, विधायक भी साथ बैठे


गुरुवार सुबह से बैठे ग्रामीणों को शुक्रवार दोपहर तक कलेक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी है, जिससे नाराजगी बढ़ गई है। इस बीच प्रशासन की ओर से मीडिया को बयान जारी किया गया कि “जनसुनवाई तो इसी लिए रखी जाती है ताकि लोग अपनी बात रख सकें।” इस बयान ने विरोध को और तीखा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनसुनवाई ही फर्जी प्रस्ताव के आधार पर बुलाई गई है, तो उसमें शामिल होना उनके विरोध को कमजोर करेगा। धरना स्थल पर धरमजयगढ़ विधायक लालजीत सिंह राठिया और खरसिया विधायक उमेश पटेल भी पहुंच गए हैं। दोनों विधायकों ने प्रशासन पर जनभावनाओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि जनसुनवाई रद्द किए बिना ग्रामीण पीछे नहीं हटेंगे।

जल-जंगल-जमीन” बचाने की जिद, ग्रामीणों का संकल्प अडिग
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का कहना है कि अडानी समूह की अम्बुजा सीमेंट द्वारा प्रस्तावित इस कोयला खदान से क्षेत्र की कृषि, जलस्तर और पर्यावरण पर गंभीर असर पड़ेगा। पुरुंगा, तेन्दुमुड़ी और साम्हरसिंघा जैसे गांवों में अधिकांश लोग खेती, मवेशी पालन और जंगल पर निर्भर हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि खदान शुरू होने पर उनकी जमीन छिन जाएगी, नदी-नाले सूख जाएंगे और जीवन का आधार खत्म हो जाएगा। “हम रोजगार नहीं, अपने जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा चाहते हैं” — यह नारा पूरे धरना स्थल पर गूंज रहा है। शुक्रवार दोपहर तक भी कलेक्टर के नहीं पहुंचने से प्रदर्शनकारियों में नाराजगी है, जबकि ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक जनसुनवाई रद्द नहीं होती, वे आंदोलन स्थल से नहीं हटेंगे।

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