रायपुर/जगदलपुर, 29 अगस्त 2025।

बस्तर संभाग में लगातार हुई भारी बारिश और बाढ़ से जनजीवन पटरी से उतर गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से 8 लोगों की मौत, 96 मवेशियों की जान गई है, करीब 500 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और 16 पुल व पुलिया टूटने से कई गांवों का संपर्क कट गया है। मुख्यमंत्री विश्‍णु देव साय ने स्थिति पर उच्चस्तरीय समीक्षा कर युद्धस्तर पर राहत-बचाव और ढांचे की मरम्मत के निर्देश दिए हैं। 

सबसे ज्यादा असर कहाँ

दांतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और बस्तर जिलों में नदियां उफान पर, कई गांव ‘टापू’ बन गए। इंद्रावती समेत प्रमुख नदियों के जलस्तर में तेज़ वृद्धि दर्ज।  प्रशासन ने 2,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों/राहत शिविरों में पहुँचाया; IAF के हेलीकॉप्टर और SDRF/स्थानीय टीमें तैनात। 

सरकार की तैयारी और निर्देश

विदेश दौरे (दक्षिण कोरिया) पर रहते हुए भी CM ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कलेक्टरों/अधिकारियों के साथ समीक्षा की और राहत सामग्री की त्वरित आपूर्ति, सड़क-बिजली बहाली, आइसोलेटेड गांवों तक पहुँच सुनिश्चित करने को कहा।  राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव रीना कांगाले ने बताया कि अतिरिक्त राशन, राहत सामग्री और रेस्क्यू के लिए व्यवस्थाएँ बढ़ाई गई हैं; लगभग 500 घरों, 96 पशुधन, और 16 पुल-पुलियों के नुकसान का प्रारंभिक आंकलन है। 

घटनाक्रम: जानमाल का नुकसान

बीते दो दिनों में तेज़ बारिश/बाढ़ जनित अलग-अलग घटनाओं में 8 लोगों की मौत हुई। 27–28 अगस्त को कई हादसे रिपोर्ट हुए, जिनमें कांगेर घाटी क्षेत्र में कार के बह जाने से एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत शामिल है। 

यातायात व ढांचे को भारी चोट

NH-30 और कई ग्रामीण सड़कों पर जलभराव/कटाव से आवाजाही ठप; 16 पुल-पुलिया टूटने से राहत पहुँचाने में दिक्कतें। प्राथमिकता के आधार पर रोड कनेक्टिविटी बहाल करने का निर्देश। 

प्रशासन की अपील

नाले-पुलिया पर पानी होने पर कतई पार न करें, अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक हेल्पलाइन/सूचना पर भरोसा करें। खतरे वाले इलाकों में रहने वाले परिवार राहत शिविरों का उपयोग करें।