
घरघोड़ा विकासखंड में नाबालिग छात्र-छात्राओं द्वारा बिना लाइसेंस दुपहिया वाहनों से विद्यालय आने-जाने का मामला गंभीर रूप से सामने आया है। शिक्षा विभाग की निगरानी में यह तथ्य उजागर हुआ कि कई किशोर प्रतिदिन जोखिम भरी ड्राइविंग करते हुए स्कूल पहुँच रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना लगातार बढ़ रही है। सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के साथ यह प्रवृत्ति अभिभावकों की लापरवाही और विद्यालयों की अनदेखी का संकेत भी मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने सभी सरकारी व अशासकीय विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर तुरंत रोक सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी समय होने वाली संभावित दुर्घटना को टाला जा सके। विभाग का मानना है कि कम उम्र और बिना प्रशिक्षण के वाहन संचालन न सिर्फ कानून के विरुद्ध है, बल्कि बच्चों के जीवन से खिलवाड़ भी है। शिक्षा अधिकारी ने यह भी चेताया कि अब किसी भी संस्थान द्वारा इस मुद्दे को हल्के में लेना गंभीर लापरवाही मानी जाएगी। प्रशासन इसे सड़क सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी के रूप में देख रहा है और इसे लेकर सख्त रुख अपनाया गया है।
संस्थान प्रमुख होंगे सीधे जिम्मेदार
आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यदि किसी विद्यालय के विद्यार्थी बिना लाइसेंस दुपहिया वाहन का उपयोग करते पाए जाते हैं और किसी प्रकार की दुर्घटना घटित होती है, तो उसकी पूर्ण जवाबदेही संबंधित संस्थान प्रमुख की होगी। इस कठोर निर्देश का उद्देश्य विद्यालय स्तर पर जवाबदेही तय करना और नियमों के पालन को अनिवार्य बनाना है। शिक्षा विभाग चाहता है कि स्कूल परिसर से लेकर छुट्टी तक, परिवहन संबंधी अनुशासन को प्राथमिकता दी जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा को किसी भी स्तर पर खतरा न पहुँचे।
प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई का संकेत
सुरक्षा को लेकर जारी इस निर्देश की प्रतिलिपि कलेक्टर रायगढ़, एसडीएम घरघोड़ा, थाना प्रभारी घरघोड़ा, डीईओ रायगढ़ तथा पुलिस अधीक्षक रायगढ़ को भेजी गई है, जिससे स्पष्ट है कि अब मामला केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस, प्रशासन और स्कूल—तीनों मिलकर एक संयुक्त कार्रवाई के लिए तैयार दिख रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि नाबालिग वाहन संचालन सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज में फैल रही असावधानी की एक खतरनाक मिसाल है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। प्रशासनिक स्तर पर यह सख्ती आने वाले दिनों में सड़क सुरक्षा अभियान को और मजबूत आधार देती दिखेगी।



