रायपुर : ट्राइबल वॉरियर प्रोडक्शन, कैफ्सके फिल्म वर्क्स और दिपेश कुकरेजा प्रोडक्शन के संयुक्त बैनर तले बनी फिल्म ‘गैंग्स ऑफ रायपुर’ का नया पोस्टर हाल ही में लॉन्च किया गया है। फिल्म का निर्देशन के. शिव कुमार ने किया है, जबकि निर्माता साजिद खान हैं। मयंक रैकवार इस फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर और दिपेश कुकरेजा को-प्रोड्यूसर के रूप में जुड़े हैं। Vayam Bharat इस प्रोजेक्ट का आधिकारिक मीडिया पार्टनर है। फिल्म 28 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। बताया जा रहा है कि यह फिल्म रायपुर शहर के अंधेरे कोनों और वहां फैलते अपराध के पीछे की कहानी को बड़े परदे पर उतारेगी। पोस्टर लॉन्च के बाद से ही फिल्म सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई है और दर्शक इसके ट्रेलर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

‘जादुई गोली’ गाने से उठे विवाद, आलोचकों ने जताई आपत्ति
फिल्म से पहले रिलीज़ हुआ गाना ‘जादुई गोली’ विवादों में घिर चुका है। इसके बोल — “जादुई गोली, नशे में टोली, खून की नदी, हड्डी तोड़े” — पर समाज के कई वर्गों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। आलोचकों और मनोवैज्ञानिकों का कहना था कि इस तरह के शब्द युवाओं के बीच नशे और अपराध को ‘कूल’ बनाकर पेश करते हैं, जो बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। हालांकि, निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि फिल्म का मकसद अपराध या नशे का महिमामंडन नहीं, बल्कि उसके विनाशकारी परिणामों को उजागर करना है। यह कहानी रायपुर में फैल रहे अवैध मेडिकल ड्रग्स और नशे के जाल पर आधारित है, जो दिखाती है कि किस तरह लालच और गलत राह समाज को भीतर से खोखला कर रहे हैं।

समाज को चेताने वाला संदेश दे सकती है फिल्म
भले ही गानों और प्रमोशन को लेकर विवाद खड़े हुए हों, मगर फिल्म का मूल विषय समाज के लिए एक गहरी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। ‘गैंग्स ऑफ रायपुर’ युवाओं को यह संदेश दे सकती है कि क्षणिक नशा और अपराध का रास्ता अंततः विनाश की ओर ले जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फिल्म अपनी कहानी को यथार्थ और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती है, तो यह समाज में जागरूकता फैलाने में अहम भूमिका निभा सकती है। इस फिल्म से उम्मीद की जा रही है कि यह नशे और अपराध के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक संदेश देने में सफल रहेगी।

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