
नई दिल्ली ।
भारत ने 2025 तक विज्ञान एवं तकनीक में अग्रणी बनने का बड़ा लक्ष्य रखा है, जिसमें अनेक अग्रिम तकनीकी क्षेत्रों में विकास की उम्मीद है। इनमें विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष मिशन जैसे गगनयान, और NASA के साथ NISAR उपग्रह सहयोग प्रमुख हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के गगनयान मिशन के तहत दिसंबर 2025 में पहला बिना क्रू बोर्ड मिशन G1 लॉन्च करने की योजना है, जिसमें Vyommitra नामक आधा-मानवकृत रोबोट होगा जो अंतरिक्ष यान की प्रणाली का परीक्षण करेगा। यह मिशन भारत को मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाली सेनाओं के विशिष्ट समूह में शामिल करने का जरिया बनेगा।
नवाचार और आत्मनिर्भरता का मार्ग
भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2025 तक उन्नत विनिर्माण, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, और रोबोटिक्स में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद है, जो आयात निर्भरता को कम कर घरेलू उद्योगों को सशक्त बनाएगी। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) के तहत ₹6003.65 करोड़ की योजना के साथ भारत क्वांटम कंप्यूटिंग में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। इस मिशन के अंतर्गत देश के प्रमुख शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों में चार थीमैटिक हब्स स्थापित किए जाएंगे। सोलाप्रदर्शन क्षमता में भी भारत निरंतर सुधार कर रहा है, जो 2024 में 32 पेंडाफ्लॉप्स तक पहुंच चुकी है।
अंतरिक्ष सहयोग और भारतीय रक्षा तकनीक विकास
NASA और ISRO की साझेदारी से विकसित NISAR उपग्रह मार्च 2025 में लॉन्च होगा, जो पृथ्वी की सतह में आ रहे बदलाव की निगरानी करेगा। यह उपग्रह दो अलग-अलग तरंग दैर्ध्य (L-band और S-band) वाले राडार का उपयोग करेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर भूमि, ग्लेशियर, और पारिस्थितिकी तंत्र में सूक्ष्म परिवर्तन मापना संभव होगा।
रक्षा क्षेत्र में भारत ने पिछले तीन वर्षों में DRDO के लिए ₹29,558 करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर किए हैं, जिसमें देशी आयुध जैसे कावरी डेरिवेटिव इंजन (Kaveri Derivative Engine) विकास भी शामिल है जो मानवरहित युद्धक विमानों के लिए है। इसके अलावा, iDEX (Innovations for Defence Excellence) कार्यक्रम के माध्यम से MSMEs, स्टार्टअप्स, और शैक्षिक संस्थानों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि नई रक्षा तकनीकों का विकास हो सके। इन प्रयासों से भारत अपनी रक्षा सुरक्षा को मजबूत करते हुए आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है।
निष्कर्ष
भारत का 2025 तक विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, नवाचार, और वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने का लक्ष्य स्पष्ट है। AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष मिशनों और रक्षा तकनीकी विकास में दिख रहा तेजी से यह स्पष्ट होता है कि भारत उच्च तकनीकी क्षेत्रों में वैश्विक मानकों पर खड़ा होता जा रहा है। ये उपलब्धियां न केवल देश की तकनीकी प्रगति का प्रमाण हैं बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास और सुरक्षा को भी मजबूत करेंगी, जिससे भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में उभरेगा ।
