ई–अटेंडेंस एप पर सवाल, शिक्षकों का बड़ा दावा
निजी डेटा लीक सहित बड़े खतरे

मध्यप्रदेश में शिक्षकों के लिए लागू किया गया ई-अटेंडेंस एप अब विवादों में घिर गया है। शिक्षक संघ ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस एप के जरिये शिक्षकों की निजी जानकारी सुरक्षित नहीं है। एप लागू होने के बाद से कई शिक्षकों के मोबाइल पर अज्ञात नंबरों से कॉल और संदेश आने लगे हैं। कुछ शिक्षकों ने शिकायत दर्ज कराई है कि कॉल करने वाले लोग उनकी निजी जानकारी मांग रहे हैं और यहां तक कि ओटीपी तक पूछ रहे हैं। इससे स्पष्ट है कि एप के माध्यम से डेटा किसी न किसी तरह से लीक हो रहा है। शिक्षक संघ का कहना है कि यह स्थिति बेहद खतरनाक है क्योंकि शिक्षकों की व्यक्तिगत जानकारी और मोबाइल नंबर साइबर अपराधियों तक पहुंच सकते हैं।
पाकिस्तान और चीन की कंपनियों से जुड़ा कनेक्शन !!
मामले को और गंभीर बनाता है एप से जुड़ी कंपनी का विदेशी कनेक्शन। जानकारी सामने आई है कि ई-अटेंडेंस एप बनाने वाली कंपनी में पाकिस्तानी, बांग्लादेशी और चीनी तकनीकी विशेषज्ञ जुड़े हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, कंपनी के एक अधिकारी पाकिस्तानी मूल के हैं, वहीं बांग्लादेशी सॉफ्टवेयर इंजीनियर और चीनी तकनीकी अधिकारी भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा रहे हैं। इस खुलासे ने शिक्षकों और अभिभावकों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। शिक्षक संघ का कहना है कि यदि एप से जुड़ी कंपनियां विदेशी हैं तो यह सीधे-सीधे डेटा सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है। संघ ने आशंका जताई है कि संवेदनशील जानकारी गलत हाथों में जा सकती है और इसका दुरुपयोग हो सकता है।
शिक्षक संघ की मांग,मामले की हो जांच
शिक्षक संघ ने सरकार से तुरंत इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि जब तक तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा एप की सुरक्षा की पूरी तरह से पुष्टि नहीं की जाती, तब तक शिक्षकों की व्यक्तिगत जानकारी खतरे में रहेगी। संघ का आरोप है कि सरकार ने बिना ठोस जांच और सुरक्षा ऑडिट के इस एप को लागू कर दिया, जिसके नतीजे अब सामने आ रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि वे लगातार अनजान कॉल्स और संदेशों से परेशान हैं और उन्हें डर है कि आने वाले समय में साइबर फ्रॉड की घटनाएं और बढ़ सकती हैं। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए, तो बड़े स्तर पर विरोध किया जाएगा।
