रायगढ़ जिले में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच पुलिस ने एक महत्वपूर्ण सफलता दर्ज की है। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के ‘समन्वय’ पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर साइबर सेल रायगढ़ कई संदिग्ध बैंक खातों की जांच कर रहा था। प्रदेश के विभिन्न बैंकों में साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त रकम के लेनदेन का विश्लेषण करते हुए पुलिस को एक संदिग्ध खाता सक्रिय रूप में मिला। इसी जांच की परतें खुलने पर इसका संबंध आगे जाकर पुसौर क्षेत्र से जुड़ता दिखा। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई और खाता धारकों तक पहुँचने के लिए विशेष टीम बनाई गई।

मासिक 1000 रुपये के लालच में खुलवाया गया था खाता
जांच में पता चला कि कारीछापर निवासी ईश्वर सिदार को गांव के ही ऋषि कुमार सिदार ने प्रतिमाह 1000 रुपये देने का लालच देकर उसके नाम से बैंक खाता खुलवाया था। ईश्वर ने कर्नाटक बैंक में खाता खुलवाकर पासबुक ऋषि को सौंप दी, जिसके एवज में उसे तय राशि भी दी गई। बाद में पुलिस ने पाया कि उक्त खाते में 6,92,200 रुपये साइबर ठगी की रकम के रूप में जमा हुए थे। पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी यह जानते हुए भी खाता उपलब्ध करा रहे थे कि इसका दुरुपयोग आपराधिक गतिविधियों में होना है। साइबर सेल की शिकायत पर थाना पुसौर में अपराध क्रमांक 263/2025 दर्ज कर बीएनएस की धारा 317(2), 317(4), 317(5) एवं 3(5) के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।

गिरफ्तारी के बाद नेटवर्क की गहराई से जांच जारी
अपराध प्रमाणित होने पर दोनों आरोपी—ईश्वर सिदार (29) और ऋषि कुमार सिदार (33)—को 13 नवंबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस अब इस खाते से जुड़े ठगी नेटवर्क की विस्तृत जांच में जुटी है, ताकि धन के प्रवाह और अन्य संभावित सहयोगियों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई में नगर पुलिस अधीक्षक मयंक मिश्रा, साइबर सेल डीएसपी अनिल विश्वकर्मा, थाना प्रभारी रामकिंकर यादव और एएसआई उमाशंकर विश्वाल की टीम का अहम योगदान रहा। पुलिस ने नागरिकों को सख्त चेतावनी दी है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता या दस्तावेज किसी अन्य के पास न दें, क्योंकि यह सीधे तौर पर साइबर अपराध में सहभागिता मानी जाती है।

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