योजना का परिचय
राष्ट्रीय यंत्रीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र (NAMASTE) योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है जो सफाई कर्मचारियों की गरिमा और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के लिए डिज़ाइन की गई है। यह योजना जुलाई 2023 में शुरू की गई थी और यह मैनुअल स्कैवेंजिंग की अमानवीय प्रथा को समाप्त करके स्वच्छता कार्यों को यंत्रीकृत बनाने पर केंद्रित है।

मंत्रालयों का सहयोग और कार्यान्वयन
NAMASTE योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और आवासन तथा शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से कार्यान्वित की जा रही है। योजना का क्रियान्वयन राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त विकास निगम (NSKFDC) द्वारा किया जा रहा है और यह तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) की अवधि के लिए 349.73 करोड़ रुपये के बजट के साथ चलाई जा रही है

योजना के प्रमुख उद्देश्य
मुख्य लक्ष्य:
• भारत में सफाई कार्यों से होने वाली मौतों को शून्य करना
• सभी स्वच्छता कार्य प्रशिक्षित और कुशल श्रमिकों द्वारा कराना
• सफाई कर्मचारियों का मानव मल के साथ प्रत्यक्ष संपर्क समाप्त करना
• आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ERSUs) को मजबूत बनाना
• सफाई कर्मचारियों को स्वयं सहायता समूहों में संगठित करके उद्यमिता को बढ़ावा देना

लाभार्थी और कवरेज
योजना मुख्यतः दो श्रेणियों के कर्मचारियों पर केंद्रित है:
प्राथमिक लक्षित समूह:
• सीवर और सेप्टिक टैंक स्वच्छता कर्मचारी (SSWs) – शहरी क्षेत्रों में कार्यरत
• कचरा बीनने वाले (Waste Pickers) – 2024 में योजना में शामिल किए गए

योजना देश के सभी 4800+ शहरी स्थानीय निकायों में लागू की जा रही है, जिससे लगभग एक लाख सफाई कर्मचारियों को लाभ मिलेगा

योजना के मुख्य घटक और सुविधाएं

  1. व्यक्तिगत सुरक्षा और स्वास्थ्य:
    • पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट का वितरण
    • आयुष्मान भारत-PMJAY के तहत स्वास्थ्य बीमा कवरेज
    • व्यावसायिक सुरक्षा प्रशिक्षण
  1. आर्थिक सशक्तिकरण:
    • स्वच्छता संबंधी वाहनों/उपकरणों की खरीद के लिए 5 लाख रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी
    • वैकल्पिक आजीविका के अवसर
    • उद्यमिता विकास के लिए समर्थन
  1. डिजिटल पहचान और पंजीकरण:
    • डिजिटल एप्लिकेशन के माध्यम से सफाई कर्मचारियों की प्रोफाइलिंग
    • अनूठी NAMASTE ID प्रदान करना
  1. हेल्पलाइन सेवाएं:
    • कचरा बीनने वालों के लिए 14473 हेल्पलाइन नंबर
    • आपातकालीन सहायता के लिए 14420 हेल्पलाइन

योजना की वर्तमान स्थिति और उपलब्धियां
अगस्त 2025 तक की प्रगति:
• 85,819 सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मचारी की पहचान और सत्यापन
• 76,736 कर्मचारियों को PPE किट वितरित
• 60,586 कर्मचारियों को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए
• 37,980 कचरा बीनने वालों का सत्यापन
• 568 जिम्मेदार स्वच्छता प्राधिकरण (RSAs) और 642 आपातकालीन प्रतिक्रिया स्वच्छता इकाइयों (ERSUs) का गठन

पुणे: पहला कार्यान्वयन शहर
पुणे ने 26 मार्च 2025 को NAMASTE योजना को लागू करने वाला भारत का पहला शहर बनकर इतिहास रचा। पुणे नगर निगम ने SWaCH और श्रम पंचायत के सहयोग से:
• 120 से अधिक कचरा बीनने वालों का पंजीकरण किया
• मई 2025 तक 8,000 कचरा बीनने वालों का पंजीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा
तकनीकी नवाचार और मशीनीकरण
योजना में आधुनिक तकनीक का उपयोग शामिल है:
• IIT मद्रास द्वारा विकसित HomoSEP Atom रोबोटिक समाधान
• 16 शहरों में रोबोटिक सफाई तकनीक की तैनाती
• AR/VR प्रशिक्षण मॉड्यूल का विकास
सामाजिक प्रभाव और कल्याणकारी उपाय
स्वास्थ्य और सुरक्षा:

• 54,140 लाभार्थियों को आयुष्मान भारत-PMJAY और राज्य स्वास्थ्य योजनाओं के तहत कवरेज
• 1,089 कार्यशालाओं का आयोजन सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक सफाई की रोकथाम पर
सामाजिक सुरक्षा:
• e-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण
• बच्चों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति
• स्वयं सहायता समूह का गठन
चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं
वर्तमान चुनौतियां:

• महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में वित्तीय देरी और मुआवजे की समस्याएं
• तकनीकी समाधानों की धीमी पहुंच
• नौकरशाही प्रक्रियाओं में देरी
भविष्य के लक्ष्य:
• सभी ULBs में योजना का पूर्ण कार्यान्वयन
• 100% यंत्रीकृत सफाई का लक्ष्य
• अन्य राज्यों में पुणे मॉडल का विस्तार।

निष्कर्ष
NAMASTE योजना भारत में सफाई कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह न केवल उनकी सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करती है बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का भी काम करती है। योजना के सफल कार्यान्वयन से मैनुअल स्कैवेंजिंग जैसी अमानवीय प्रथाओं का अंत हो सकता है और एक स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण का निर्माण हो सकता है। पुणे की सफलता अन्य शहरों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में काम कर सकती है।