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रायपुर। प्रदेश में नई शराब नीति को अधिक व्यावहारिक, पारदर्शी और उद्योग हितैषी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने तीन दिवसीय संवाद आयोजित किया। 13 से 15 अक्टूबर 2025 तक रायपुर में हुई इस बैठक में शराब कारोबार से जुड़े प्रमुख हितधारकों से राय ली गई। बॉटलिंग यूनिट संचालकों, विदेशी ब्रांड कंपनियों और बार-क्लब संचालकों ने इसमें हिस्सा लिया। नीति निर्माण से पहले इस तरह का संवाद पहली बार आयोजित हुआ, जिससे सरकार को उद्योग की जमीनी चुनौतियों और संभावनाओं की गहराई से समझ मिली। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से नई नीति न केवल उद्योग के लिए लाभकारी होगी बल्कि अवैध कारोबार और अव्यवस्थित व्यवस्था पर भी अंकुश लगाएगी।

बॉटलिंग यूनिट संचालकों ने उठाए उत्पादन और शुल्क से जुड़े मुद्दे

बैठक में प्रदेश की आसवनी और बॉटलिंग इकाइयों के प्रतिनिधियों ने उत्पादन, शुल्क और लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे रखे। इसमें आयात-निर्यात शुल्क, बॉटलिंग फीस, लाइसेंस फीस, काउंटरवेलिंग ड्यूटी, ऑनलाइन पेमेंट व्यवस्था, नई बोतलों के उपयोग की अनुमति और गोदाम संचालन जैसे विषयों पर सुझाव दिए गए। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि इन व्यवस्थाओं को सरल और पारदर्शी बनाने से उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार सृजन होगा और राजस्व में भी बढ़ोतरी संभव है।

विदेशी कंपनियों और बार संचालकों से मिली नई नीति के लिए अहम राय

विदेशी ब्रांड कंपनियों और सप्लायर्स के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के साथ खुलकर बातचीत की। उन्होंने काउंटरवेलिंग ड्यूटी, हैंडलिंग चार्ज, आयात-निर्यात प्रक्रिया, बॉटलिंग फीस और लाइसेंस शुल्क में सुधार के सुझाव दिए। वहीं, बार और क्लब संचालकों ने एमजी लक्ष्य, संचालन समय, लाइसेंस फीस, अवैध बिक्री पर रोक और शराब बिक्री के रेंज आधारित प्रावधानों पर चर्चा की। सभी वर्गों से प्राप्त सुझावों के आधार पर अब नई शराब नीति का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही कैबिनेट के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

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