
हमीरपुर/महाबा।
उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से भारी मानसिक दबाव में आकर फिर एक सरकारी शिक्षक ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। राठ क्षेत्र के सैना रोड दीवानपुरा निवासी 52 वर्षीय गणेशीलाल अनुरागी महोबा के उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब दो वर्षों में टीईटी परीक्षा पास न करने पर सरकारी शिक्षक की सेवा समाप्त हो सकती है। गणेशीलाल इसी चिंता में टूट चुके थे; शनिवार को उनका शव अतरौलिया स्थित अपने दूसरे घर में बिजली के तार से फांसी पर लटका पाया गया.
परिजनों के अनुसार, हाईकोर्ट के फैसले के बाद नौकरी खोने का भय और पारिवारिक जिम्मेदारियों (बेटी की शादी) की चिंता ने उनका मानसिक संतुलन बिगाड़ दिया था। पिछले कुछ दिनों से वह गहरे तनाव में थे।
इससे पहले महोबा जिले के एक अन्य शिक्षक और प्रधानाध्यापक मनोज साहू ने भी टीईटी अनिवार्यता के दबाव के चलते आत्महत्या की थी।
शिक्षक संगठनों ने सरकार और शिक्षा विभाग से अपील की है कि परीक्षा प्रक्रिया मानवीय बनाते हुए शिक्षकों की मानसिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि सिस्टम की कठोरता और संवेदनहीनता ने शिक्षकों की दैनिक जिंदगी में डर और निराशा का माहौल बना दिया है. ।
विशेषज्ञों की राय:
शिक्षा नीति में बदलाव करते समय शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य और काम के दबाव को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम दे सकता है। प्रशासन को चाहिए कि मौजूदा शिक्षकों को पर्याप्त समय, मार्गदर्शन और परामर्श देते हुए प्रगतिशील नीति लागू करे, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
यह मामला न केवल एक शिक्षक की दुखद मौत की तरफ़ ध्यान खींचता है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और नीति निर्धारकों की संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है!
