सोशल मीडिया में मचा हंगामा

छत्तीसगढ़ के पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल इन दिनों अपने करीबी सहयोगी तबरेज आलम को ‘निज सचिव’ बनाए जाने की सिफारिश को लेकर सुर्खियों में हैं। मंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग को तबरेज आलम की नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन विभाग ने उनकी शैक्षणिक योग्यता केवल आठवीं पास होने का हवाला देकर प्रस्ताव को नामंज़ूर कर दिया। बताया गया कि 29 अक्टूबर को मंत्री द्वारा जारी यह पत्र जांच के बाद खारिज कर दिया गया, क्योंकि सचिवालय सेवा भर्ती नियम 2012 के तहत इस पद के लिए हायर सेकेंडरी पास होना अनिवार्य है। विभाग के अवर सचिव मनराखन भार्गव ने मंत्री को जवाबी पत्र भेजते हुए स्पष्ट किया कि तबरेज आलम इस पद के लिए अयोग्य हैं, इसलिए उनकी नियुक्ति नहीं हो सकती। पत्र के वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और विपक्ष ने इसे शासन की योग्यता नीति पर करारा प्रहार बताया।

विपक्ष का वार—‘योग्यता नहीं, नज़दीकी चल रही है’

पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कांग्रेस ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा सरकार में योग्यता की नहीं, बल्कि नज़दीकी की राजनीति चल रही है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि जब राज्य के युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बेरोज़गार घूम रहे हैं, तब सत्ता के नज़दीकी आठवीं पास लोगों को ‘निज सचिव’ बनाने की कोशिशें शासन की नीयत पर सवाल खड़ा करती हैं। इस प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद न केवल एक नियुक्ति का मसला है बल्कि शासन में योग्यता, पारदर्शिता और नैतिकता के मानकों पर गहरी चोट करता है। फिलहाल विभाग द्वारा नियुक्ति रद्द किए जाने के बाद भी मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

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