रायगढ़ में डीजल संकट की असली वजह आई सामने, कंज्यूमर पंपों ने बढ़ाया दबाव
हजारों किलोलीटर कम डीजल मंगाने से बिगड़ी सप्लाई व्यवस्था, रिटेल पेट्रोल पंपों पर टूट पड़ा पूरा भार
रायगढ़। जिले में पिछले कई दिनों से डीजल को लेकर मची अफरा-तफरी के पीछे अब बड़ा कारण सामने आया है। प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई रिटेल पेट्रोल पंपों पर हुई, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि असली दबाव जिले के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में संचालित “कंज्यूमर पंपों” से पैदा हुआ। इन पंपों ने आवश्यकता के मुकाबले हजारों किलोलीटर कम डीजल मंगवाया, जिसके कारण पूरा बोझ आम पेट्रोल पंपों पर आ गया और हालात बिगड़ते चले गए।
क्या होते हैं कंज्यूमर पंप?
कंज्यूमर पंप ऐसे निजी ईंधन केंद्र होते हैं, जिन्हें आम जनता के लिए नहीं बल्कि उद्योगों, खदानों, ट्रांसपोर्ट कंपनियों और बड़े प्रोजेक्ट्स के स्वयं के उपयोग हेतु लाइसेंस दिया जाता है। इन पंपों से केवल कंपनी के हाइवा, डंपर, मशीनें, जेसीबी, जनरेटर और भारी वाहन संचालित किए जाते हैं।
रायगढ़ जिले में खनन और औद्योगिक गतिविधियां अधिक होने के कारण ऐसे पंपों की संख्या भी काफी ज्यादा है। वर्तमान में जिले में कुल 52 कंज्यूमर पंप संचालित हैं।
आंकड़ों ने खोली पूरी तस्वीर
| वर्ष | मंगवाया गया डीजल | अनुमानित वास्तविक मांग |
|---|---|---|
| अप्रैल 2025 | 12,458 किलोलीटर | — |
| अप्रैल 2026 | 8,481 किलोलीटर | करीब 14,000 किलोलीटर |
यानी जरूरत की तुलना में लगभग 6,000 किलोलीटर कम डीजल मंगवाया गया। यही कमी बाद में रिटेल पेट्रोल पंपों पर भारी दबाव बनकर सामने आई। इसके विपरीत जिले के लगभग 140 रिटेल पंपों ने स्थिति संभालने के लिए करीब 3,000 किलोलीटर अतिरिक्त डीजल मंगवाया, लेकिन इसके बावजूद मांग पूरी नहीं हो सकी।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा कंज्यूमर पंप?
- रायगढ़ – 15
- तमनार – 12
- घरघोड़ा – 9
- खरसिया – 8
- धरमजयगढ़ – 5
- पुसौर – 2
- लैलूंगा – 1
इन क्षेत्रों में कई बड़े उद्योग और कंपनियां संचालित हैं, जिनका पूरा संचालन भारी मात्रा में डीजल पर निर्भर है।
जरीकेन पर रोक क्यों लगानी पड़ी?
डीजल संकट बढ़ने के साथ कई पेट्रोल पंपों में वाहनों से ज्यादा जरीकेन लेकर पहुंचने वालों की भीड़ लगने लगी थी। इससे कालाबाजारी और अतिरिक्त स्टॉकिंग की आशंका बढ़ गई। प्रशासन ने स्थिति नियंत्रण में रखने के लिए अब जरीकेन में डीजल देने पर रोक लगा दी है।
पांच पेट्रोल पंपों पर कार्रवाई
बीते एक सप्ताह के दौरान प्रशासन ने जिले के पांच पंपों पर जांच कर कार्रवाई की है। अनियमित सप्लाई और रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ियों के आरोप में संचालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन मामलों को अब कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है।
प्रशासन के सामने अब असली चुनौती
जानकारों का मानना है कि यदि बड़े औद्योगिक उपभोक्ता अपनी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार डीजल की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं करते, तो आम जनता को राहत मिलना मुश्किल होगा। रिटेल पंपों पर कार्रवाई से तत्काल व्यवस्था तो नियंत्रित हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान तभी संभव है जब कंज्यूमर पंपों की मांग, स्टॉक और वास्तविक खपत की निगरानी सख्ती से की जाए। वरना आने वाले दिनों में फिर डीजल संकट गहराने की आशंका बनी रहेगी।
