घरघोड़ा :

घरघोड़ा में स्थित कृषि सूचना एवं सलाह केंद्र इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। भवन की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। छत से प्लास्टर झड़ना, दीवारों में दरारें और सुविधाओं का अभाव यहाँ आने वाले किसानों और काम करने वाले कर्मचारियों की चिंता बढ़ा रहा है।

स्थानीय अधिकारी लंबे समय से उच्चाधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराते रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी गुहार अनसुनी ही रह गई है।
केंद्र के कर्मचारी प्रतिकूल और जोखिम भरे हालात में भी अपनी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं। यह स्थिति उनके समर्पण को तो दर्शाती है, लेकिन यह भी सवाल खड़ा करती है कि आखिर उनके बुनियादी सुरक्षा और कार्यस्थल की गरिमा की रक्षा क्यों नहीं की जा रही?

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान में सरकारी भवन की छत ढहने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें कई निर्दोष लोगों की जान गई। ऐसे में घरघोड़ा के इस केंद्र की दशा को लेकर अधिकारियों की चुप्पी और भी चिंताजनक है।
प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल


• केंद्र के कर्मचारी और वहाँ आने वाले किसान पिछले कई महीनों से दफ्तर में पानी टपकने, जमीन पर फैले कीचड़ और बदबूदार वातावरण में काम कर रहे हैं, जिससे फाइलें व कंप्यूटर भी खराब होने लगे हैं।

• अधिकारी बार-बार उच्चाधिकारियों को ज्ञापन, शिकायती पत्र और फोटो सबूत भेजते रहे, मगर सभी फरियादें कागजों तक ही सीमित रह गईं।
हादसे की आशंका, लेकिन जागा नहीं प्रशासन

• स्थानीय कर्मचारी—जो इन हालात में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं—की कार्यनिष्ठा और साहस तो अद्भुत है, लेकिन उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज करना सर्वोच्च अधिकारियों की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।

माँग: तत्काल मरम्मत नहीं तो जवाबदेही तय हो
• किसान संगठनों, कर्मचारियों और क्षेत्र के लोगों ने मांग की है कि तुरंत भवन मरम्मत/पुनर्निर्माण कराया जाए अथवा जिम्मेदार अधिकारी के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।

• कई बार चेतावनी देने के बावजूद जब प्रतिक्रिया न मिले तो यह सीधे जिम्मेदार अधिकारियों की संवेदनहीनता और लापरवाही को उजागर करता है।


निष्कर्ष:


ऐसे केंद्र में न केवल कर्मचारियों और किसानों की जान खतरे में है, बल्कि सरकार की योजनाओं का लाभ भी प्रभावित हो रहा है। प्रशासन से निवेदन है कि तुरंत कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके।