
पूँजीपथरा :
पूंजीपथरा में आज बालू से लदी हाईवा सी.जी. 13 ए.वि. 9613 को पूँजीपथरा थाना द्वारा जब्त किया गया,सूचना अनुसार गाड़ी मालिक रितेश गुप्ता से पूछताछ जारी है , जिससे अवैध रेत खनन रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसके तार घरघोड़ा क्षेत्र से जुड़े चोरों व राजनीतिक संरक्षण की ओर इशारा करते हैं!लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण के आरोप लगते रहे हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि पुलिस-प्रशासन और नेताओं की मिलीभगत से अवैध कारोबारियों के हौसले बुलंद हैं और बालू माफिया बेखौफ होकर खुलेआम अवैध रेत परिवहन कर रहे हैं.
पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए वाहन जब्ती की कार्रवाई की है और आरोपितों की तलाश तेज कर दी है। इस मामले में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 (MMDR Act) की धारा 21(5) के तहत कार्रवाई संभव है, साथ ही अपराध की गंभीरता को देखते हुए आईपीसी की धारा 379 (चोरी) और 120B (षड्यंत्र) भी लगाई जा सकती है.
अवैध बालू खनन के खिलाफ राज्य सरकार ने हाल ही में सख्त नीति लागू की है, जिसमें पारदर्शी नीलामी, ऑनलाइन सिस्टम और जिला खनिज संस्थान की विशेष निगरानी शामिल है। इसके बावजूद, प्रशासनिक संरक्षण और राजनीतिक सरपरस्ती के कारण सिंडिकेट का मनोबल ऊँचा है और आमजन में आक्रोश है.

कानून और धाराएँ
- छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन पर खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR एक्ट) लागू है।
- आमतौर पर धारा 21(5) (जुर्माना व वाहन जब्ती), 15 (गौण खनिज नियम), और 23(ए) के तहत कार्यवाही होती है.
- अपराध की गंभीरता के अनुसार, IPC की धाराएँ जैसे 379 (चोरी), और 120B (षड्यंत्र) भी जोड़ी जा सकती हैं.
राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक निष्क्रियता
- कई स्थानों पर रेत चोरी को प्रशासनिक-पुलिस संरक्षण प्राप्त है, विपक्ष और मीडिया लगातार इस मुद्दे को सदन और खबरों में उठाता है, लेकिन कठोर कार्रवाई कम ही दिखती है.
- माफिया बेखौफ होकर निर्भीकता से नदी-घाटों पर रेत निकालते हैं, स्थानीय राजनेताओं के सहयोग से संगठित सिंडिकेट काम करते हैं, जिससे सरकार की साख पर सवाल उठ रहे हैं.
छत्तीसगढ़ की नई खनन नीति
- छत्तीसगढ़ सरकार ने जुलाई 2025 में रेत खनन और परिवहन के लिए नए नियम लागू किए हैं, जिससे ऑनलाइन नीलामी, पारदर्शिता और अवैध उत्खनन पर अंकुश लगाने के प्रावधान शामिल किए हैं.
- टास्क फोर्स, पर्यावरणीय निगरानी, और जिला खनिज संस्थान की भूमिका को एक्टिव किया गया है.
स्थानीय जनता और विपक्ष सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं:
- जिम्मेदार विभाग, पुलिस और नेताओं की मिलीभगत पर आरोप!
- खुलेआम रेत चोरी, कार्यवाही सिर्फ दस्तावेजों तक सीमित
- कानून का डर नहीं, सरकार की नई नीति की प्रभावशीलता संदेह के घेरे में!
अब देखना है – कड़ी धाराओं में केस दर्ज कर क्या प्रशासन वाकई चोरों पर शिकंजा कस पाएगा, या राजनीतिक संरक्षण के तले बालू चोर ऐसे ही बेलगाम रहेंगे?

