वन विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल, ग्रामीणों में बढ़ी नाराजगी
रायगढ़: विकास की तथाकथित गाथाओं के बीच अब कम्पनियों फैक्टरियों से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों का नियम कायदों से परे डिस्पोज रायगढ़ के जँगलो के लिए जानलेवा खतरा बनता जा रहा है ।पूंजीपथरा औद्योगिक पार्क के बाद पड़ने वाले जंगल मे जमडबरी गांव से गौरमुड़ी की ओर जाने वाले जंगल मार्ग में भारी मात्रा में फ्लाई ऐश फैला हुआ मिला है, जिससे पूरे क्षेत्र में धूल, प्रदूषण और वनभूमि को नुकसान की आशंका गहरा गई है। ग्रामीणों ने बताया कि वन विभाग की जमीन पर खुलेआम फ्लाई ऐश डम्प किया जा रहा है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई रोक-टोक या कार्रवाई नहीं की गई है। यह स्थिति विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है कि आखिर जंगल के बीच बिना अनुमति के फ्लाई ऐश कौन और किसकी छूट से डाल रहा है। दैनिक आवागमन करने वाले लोगों को उड़ती राख से परेशानी हो रही है और रास्ते का स्वरूप भी बिगड़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि ट्रकों की आवाजाही साफ देखी गई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन हैं, जिससे संदेह और बढ़ रहा है।
कंपनियों की भूमिका पर शक, पर्यावरणीय नियमों की खुली अनदेखी
जंगल मार्ग के आसपास कई बड़ी औद्योगिक इकाइयों के होने से ग्रामीणों में आशंका है कि किसी कंपनी की फ्लाई ऐश यहां अवैध रूप से डम्प की जा रही है। जिंदल पार्क, पूंजीपथरा के आगे स्थित इस क्षेत्र में जंगल की मिट्टी फ्लाई ऐश की मोटी परत से ढक चुकी है, जिससे वनस्पति और जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है। नियमों के अनुसार फ्लाई ऐश का निस्तारण तय मानकों और अधिकृत स्थानों पर किया जाना चाहिए, लेकिन यहां खुले जंगल में इसका फेंका जाना पर्यावरणीय कानूनों की खुली धज्जियां उड़ाने जैसा है। ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या को कई बार अधिकारियों के सामने रखा गया है, लेकिन न तो निरीक्षण हुआ और न कार्रवाई, जिससे प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
तत्काल कार्रवाई की मांग, जंगल बचाने की गुहार
ग्रामीणों ने शासन–प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि मामले की तुरंत जांच कर अवैध डम्पिंग करने वाले वाहन, कंपनी और जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान की जाए। साथ ही जंगल क्षेत्र से फ्लाई ऐश हटाकर मिट्टी और वनभूमि के संरक्षण के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में यह पूरा इलाका प्रदूषण, स्वास्थ्य जोखिम और बंजरपन का शिकार हो सकता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या के समाधान में देरी हुई तो वे आंदोलन के लिए भी मजबूर होंगे।
