रायगढ़। जिले में बाइक चोरी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। रायगढ़ मुख्यालय से लेकर घरघोड़ा, लैलूंगा और धरमजयगढ़ जैसे कस्बों तक कई स्थानों पर दोपहिया वाहनों की चोरी ने पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताज़ा दो मामलों में भी पीड़ितों ने अपनी मोटरसाइकिल चोरी होने की शिकायत 24 नवंबर को दर्ज कराई है, जो यह संकेत देता है कि जिले में लगातार हो रही चोरी की वारदातों पर अब तक प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है।

पहली FIR : 23 को चोरी, 24 को रिपोर्ट

पहले मामले में पीड़ित ने अपनी Splendor Plus बाइक को 23 नवंबर की रात सुरक्षित स्थान पर खड़ी किया था। अगले दिन सुबह वाहन गायब मिला। आसपास खोजबीन के बाद भी कोई जानकारी न मिलने पर पीड़ित ने 24 नवंबर को थाने जाकर अज्ञात आरोपी के खिलाफ 303(2) BNS के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई।

दूसरी FIR : 19 को चोरी, 24 को रिपोर्ट

दूसरे मामले में पीड़ित की Hero Honda CD Deluxe बाइक 19 नवंबर को चोरी हो गई थी। कई दिनों की तलाश के बाद भी कोई सुराग नहीं मिलने पर उसने भी 24 नवंबर की शाम थाना पहुंचकर मामला दर्ज कराया। इस मामले में भी अज्ञात चोरों के खिलाफ 303(2) BNS के तहत FIR दर्ज हुई है।


गैंग का सक्रिय होना या पुलिस की ढील? लगातार बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंताएँ

जिले में मोटरसाइकिल चोरी की बढ़ती घटनाएँ अब यह संकेत देने लगी हैं कि मामले सिर्फ अलग-अलग वारदातें नहीं, बल्कि कहीं न कहीं संगठित तौर पर संचालित चोरी के नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। शहर के कई हिस्सों में रात के समय गश्त का अभाव, सीमित सीसीटीवी कवर और चोरों के लिए आसान भागने के रास्ते होने से वाहन चोरी आसान हो जाती है। सूत्र बताते हैं कि चोरी हुई बाइकें अक्सर ऐसे इलाकों में पहुँचाई जाती हैं जहाँ कागज़ात की जांच सख्त नहीं होती या फिर उन्हें पार्ट्स में बदलकर बेचा जाता है।

इसी व्यवस्थित प्रक्रिया ने बाइक चोरी को कम जोखिम वाला लाभदायक धंधा बना दिया है, जिसमें स्थानीय स्तर से लेकर बाहरी राज्यों के नेटवर्क तक शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। लगातार वारदातें यह साफ संदेश दे रही हैं कि जिले की सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत सख्त किए बिना स्थिति पर काबू पाना मुश्किल होगा।


सुरक्षा पर सवाल, कार्रवाई की मांग तेज

लगातार बढ़ती चोरी ने आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय में ही वाहन सुरक्षित नहीं हैं, तो कस्बों और गांवों की स्थिति आसानी से समझी जा सकती है। पुलिस द्वारा कुछ मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है, लेकिन अभी भी अधिकांश घटनाएँ अनसुलझी हैं, जिससे जनता में असंतोष स्पष्ट है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि जिले में वाहन चोरी पर रोक तभी लगेगी जब पुलिस संगठित तरीके से नाइट पेट्रोलिंग बढ़ाए, संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी को दुरुस्त करे और चोरी के नेटवर्क पर केंद्रित अभियान चलाए


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