रायगढ़। छत्तीसगढ़ शासन ने जिले की 16 रेत खदानों की नीलामी इस बार पूरी तरह से ऑनलाइन ई-ऑक्सन प्रणाली के माध्यम से करने का निर्णय लिया है। यह पहली बार है जब प्रदेश में रिवर्स ऑक्सन के तहत रेत खदानों की नीलामी की जा रही है, जिसके चलते विभागीय अधिकारी और कर्मचारी प्रक्रिया को लेकर तैयारियों में जुटे हैं। पूरे जिले की खदानों को तीन चरणों में बांटा गया है ताकि तकनीकी और प्रशासनिक कार्यवाही सुचारू रूप से पूरी हो सके। पहले चरण की शुरुआत 31 अक्टूबर से होगी, जिसमें इच्छुक आवेदक एमएसटीसी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके लिए अंतिम तिथि 6 नवंबर तय की गई है। इसके बाद टेंडर खोलकर पात्रता की जांच और आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। नीलामी की वास्तविक प्रक्रिया नवंबर के पहले सप्ताह से प्रस्तावित है।

पहले चरण में पांच रेत घाटों की नीलामी तय
प्रथम चरण के तहत पांच रेत खदानों के लिए टेंडर जारी किया गया है। इनमें खरसिया का बरभौना, धरमजयगढ़ क्षेत्र का बायसी, घरघोड़ा का कंचनपुर, रायगढ़ ब्लॉक का लेबड़ा और छाल क्षेत्र का पुसल्दा शामिल हैं। वहीं दूसरे चरण में कुल छह रेत खदानों के लिए शुक्रवार को अधिसूचना जारी की गई है। इस चरण की नीलामी प्रक्रिया 14 नवंबर से शुरू होगी, क्योंकि प्रकाशन के 21 दिन बाद ऑनलाइन तकनीकी बोली आमंत्रित की जाएगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, हर चरण में नीलामी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और स्थानीय स्तर पर विवाद की संभावनाओं को कम करने के उद्देश्य से समयांतराल रखा गया है।

तीसरे चरण में नवंबर अंत तक बचे रेत घाटों की बारी
तीसरे और अंतिम चरण में पांच रेत घाटों की नीलामी प्रस्तावित है, जिसकी प्रक्रिया नवंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगी। इस चरण में घरघोड़ा के छिरभौना, छाल के जोगड़ा, रायगढ़ क्षेत्र के सरडामाल, डूमरपाली और दुलोपुर रेत घाट शामिल हैं। ये सभी रेत खदानें मांड और कुरकुट नदी तट पर स्थित हैं। विभाग का कहना है कि ई-ऑक्सन प्रणाली से नीलामी से पारदर्शिता बढ़ेगी, राजस्व में वृद्धि होगी और स्थानीय हितों की रक्षा भी सुनिश्चित की जाएगी। नई प्रक्रिया को लेकर ठेकेदारों में उत्साह तो है ही, साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस डिजिटल व्यवस्था से अवैध रेत उत्खनन पर भी रोक लगेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *